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नालंदा में शराब को लेकर खूनी झगड़ा, 55 वर्षीय व्यक्ति की हत्या, पुलिस छापेमारी जारी

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नालंदा के मुसहरी गांव में शराब विवाद के दौरान 55 वर्षीय व्यक्ति की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। पुलिस जांच में जुटी, आरोपी फरार, इलाके में तनाव।

नालंदा/आलम की खबर:बिहार के नालंदा जिले से एक बार फिर ऐसी घटना सामने आई है जिसने शराबबंदी कानून की जमीनी हकीकत पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि मुख्यमंत्री Nitish Kumar के गृह जिले में ही शराब को लेकर हुआ एक मामूली विवाद देखते ही देखते खूनी संघर्ष में बदल गया और एक अधेड़ व्यक्ति की जान चली गई। यह पूरा मामला नालंदा थाना क्षेत्र के बड़गांव स्थित मुसहरी गांव का है, जहां रविवार को हुए इस हिंसक घटनाक्रम ने पूरे इलाके में दहशत और तनाव का माहौल पैदा कर दिया है, वहीं परिजन और ग्रामीण आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं।

मृतक की पहचान करीब 55 वर्षीय चंदेश्वर मांझी के रूप में की गई है, जो अपने परिवार के इकलौते कमाऊ सदस्य थे और स्थानीय स्तर पर मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे। परिजनों के अनुसार, वह एक होटल में काम करते थे और सप्ताह में एक दिन होटल बंद रहने के कारण घर लौटे हुए थे, लेकिन उन्हें यह अंदाजा नहीं था कि उसी दिन एक छोटी सी कहासुनी उनकी जिंदगी पर भारी पड़ जाएगी। घटना के संबंध में जो जानकारी सामने आई है, उसके अनुसार चंदेश्वर मांझी अपने पड़ोसी के यहां गए थे, जहां कथित तौर पर शराब पीने को लेकर विवाद शुरू हुआ और धीरे-धीरे यह झगड़ा इतना बढ़ गया कि मामला मारपीट तक पहुंच गया।

मृतक के बेटे गोपाल कुमार ने आरोप लगाया है कि उनके पिता पड़ोसी वीरेश मांझी के यहां गए थे, जहां शराब पीने के दौरान किसी बात को लेकर कहासुनी हो गई, और देखते ही देखते स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई। आरोप है कि वीरेश मांझी और उसके साथ मौजूद अन्य लोगों ने लाठी-डंडों से हमला कर चंदेश्वर मांझी को बुरी तरह घायल कर दिया, जिससे वह मौके पर ही अचेत हो गए। गंभीर हालत में परिजन उन्हें तत्काल अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया, जिससे पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।

घटना के बाद गांव में तनाव का माहौल बना हुआ है और स्थानीय लोग इस घटना से काफी आक्रोशित हैं, क्योंकि यह मामला सिर्फ एक हत्या तक सीमित नहीं है बल्कि इसके पीछे अवैध शराब के कारोबार की भी चर्चा हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि इलाके में लंबे समय से चोरी-छिपे शराब का कारोबार चल रहा है, जिससे इस तरह के विवाद अक्सर होते रहते हैं, लेकिन इस बार मामला जानलेवा साबित हुआ। यह घटना एक बार फिर इस बात की ओर इशारा करती है कि शराबबंदी के बावजूद ग्रामीण इलाकों में अवैध शराब का नेटवर्क पूरी तरह खत्म नहीं हो पाया है और इससे जुड़े अपराध लगातार सामने आ रहे हैं।

सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी गई है। थाना स्तर पर अधिकारियों ने बताया कि शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है, ताकि मौत के सही कारणों की पुष्टि हो सके। साथ ही, आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है, लेकिन घटना के बाद से सभी आरोपी गांव छोड़कर फरार बताए जा रहे हैं, जिससे पुलिस के सामने उन्हें पकड़ने की चुनौती बढ़ गई है।

पुलिस का कहना है कि मामले के हर पहलू की गंभीरता से जांच की जा रही है और दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। इसके साथ ही इलाके में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती और निगरानी भी बढ़ा दी गई है, ताकि किसी तरह की अप्रिय घटना दोबारा न हो सके।

इस पूरी घटना ने एक बार फिर बिहार में लागू शराबबंदी कानून की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि जहां एक तरफ सरकार इस कानून को सख्ती से लागू करने का दावा करती है, वहीं दूसरी तरफ इस तरह की घटनाएं यह दिखाती हैं कि जमीनी स्तर पर अभी भी कई चुनौतियां मौजूद हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सिर्फ कानून बनाना ही काफी नहीं है, बल्कि उसके प्रभावी क्रियान्वयन और निगरानी की भी उतनी ही जरूरत होती है, ताकि समाज में इस तरह की घटनाओं पर रोक लगाई जा सके।

कुल मिलाकर, नालंदा के मुसहरी गांव में हुई यह घटना न सिर्फ एक परिवार के लिए अपूरणीय क्षति है, बल्कि यह पूरे समाज के लिए एक चेतावनी भी है कि शराब और उससे जुड़े विवाद किस तरह से हिंसक रूप ले सकते हैं, और ऐसे में प्रशासन और समाज दोनों को मिलकर इस समस्या का स्थायी समाधान निकालने की जरूरत है।

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